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education system of india

 



एजुकेशन ऑफ़ इंडिया 



किसी भी देश का भविष्य उस देश के एजुकेशन सिस्टम पर निर्भर करता है। जिस देश की साक्षरता दर जितनी ज्यादा होगी वो देश उतना ही डेवेलोप होगा। सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत पर कई विदेशी आक्रमणकारियो ने बंधी बनाया था और सभी ने अपने अनुसार भारतीय संस्कृति को बदल दिया।  अगर अब की बात करे तो एजुकेशन अब पहले जैसी नई रही। 


एजुकेशन सिस्टम के ४ लेवल्स : लोअर( age ६ तो १०),उप्पेर प्राइमरी(११ and  १२),हाई(१३ तो १५),हायर सेकंडरी(१७ तो १८। lower प्राइमरी school  ५ भागो में डिवाइडेड होता है। उप्पेर प्राइमरी स्कूल २ ,high स्कूल into  ३ एंड हायर सेकंडरी ईंटो २। 






भारत का इतिहास 


भारत में ज्ञान देने की परंपरा लम्बे समय सी चली आ रहीं। प्राचीनकाल में स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए गुरुकुल जाते थे। 


विश्व का सबसे फेमस विश्वविधालय नालंदा था। दुनिया से स्टूडेंट्स यह पड़ने आते थे। 

 


एजुकेशन सिस्टम आफ्टर इंडेपेंनडेंस 


भारत शिक्षा के ४ स्टैण्डर्ड होते है । 


भारतीय संविधान में शिक्षा के लिए अलग से अधिकार  दिए गए है।  इनमे ६ से १४ साल के बचो के लिए फ्री में अनुमति दी गयी है। 


हाई स्कूल के बच्चो की age १४ से १८ साल तक होती है। 


शिक्षा इंसान को इंसान बनती है। शिक्षा इंसान के character को उज्जवल बनाती है। 




प्राचीन कल की शिक्षा 


spirituality 


सेल्फ realization 


religion  एंड कंडक्ट 


नॉलेज एंड क्यूरोसिटी 


इंडिपेंडेंट मोरल वैल्यूज 


टोलेरेंस 



Todays एजुकेशन 


इंडिया की एजुकेशन सिस्टम को डेली कोई न कोई समस्या का सामना करना पड़ता है।


 पब्लिक स्कूल अब वर्करोडेड और ओवरफंडेड होते जा रहे है। इंडिया का कल्चर इतना  स्ट्रांग है की ये एजुकेशन को स्पोर्ट करता है। 


इंडिया में एंटी जनसँख्या को शिक्षित करना मुश्किल है इसके लिए गवर्नमेंट ने कई तरह के एडुवकाशन प्रोग्राम चलाये हुए है। 

  

टीचर प्लेस इम्पोरटेंट रोले इन एजुकेशन। टीचर्स आल्सो नीड तो टाइम  तो टाइम स्किल्ड। 


कुछ स्कूल्ज में पढ़ने के लिए पूरी सुविधा नहीं होती न ही कोई बुक न कोई टेक्नोलॉजी। 


 

Problems in the Education System


इंडिया की एजुकेशन सिस्टम को डेली कोई न कोई समस्या का सामना करना पड़ता है।


 पब्लिक स्कूल अब वर्करोडेड और ओवरफंडेड होते जा रहे है। इंडिया का कल्चर इतना  स्ट्रांग है की ये एजुकेशन को स्पोर्ट करता है। 


इंडिया में एंटी जनसँख्या को शिक्षित करना मुश्किल है इसके लिए गवर्नमेंट ने कई तरह के एडुवकाशन प्रोग्राम चलाये हुए है। 

  

टीचर प्लेस इम्पोरटेंट रोले इन एजुकेशन। टीचर्स आल्सो नीड तो टाइम  तो टाइम स्किल्ड। 


कुछ स्कूल्ज में पढ़ने के लिए पूरी सुविधा नहीं होती न ही कोई बुक न कोई टेक्नोलॉजी। 


 अब एजुकेशन में कमी आ गयी है। लोगो ने एजुकेशन सिस्टम को बदल कर उसकी क्वालिटी में कमी क्र दी है। 


अब स्कूल की बुक्स में मोरल वैल्यूज की कमी हो गयी है। 


स्कूल और कॉलेजेस का ख़राब रिजल्ट देना। 


स्कूल्ज में दी जाने वाली शिक्षा और उद्योग के लिए की जाने वाली एजुकेशन में अंतर। 


महँगी हायर स्टडीज 


भारतीय बच्चो के लिए सुविधाओं की कमी 



एजुकेशन का नया स्वरूप 

अब एजुकेशन में नए नए बदलाव किये जा रहे है।  कोरोना के बाद एजुकेशन में भाव बदलाव देखने को मिला है सिलेबस का २५% हिस्सा काट दिया दिया है और सिलेबस को पूरी तरह से चेंज क्र दिया गया है। 


टीचर्स की स्किल्स में सुधर करना 

टीचर इस मोस्ट इम्पोर्टेन्ट इन एजुकेशन फील्ड।  शिक्षको को उनकी स्किल्स डेवेलोप करने के लिए प्रशिक्षण देना किये। शिक्षको को बच्चो के साथ किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं करना किये। शिक्षको को क्लासेज के साथ साथ ऑनलाइन में भी प्रशिक्षण मिलना किये। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाको में शिक्षा को एडवांस्ड पहुलओं से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता ह। 


मार्क्स 

 एजुकेशन सिस्टम में बच्चो को मार्क्स की तरफ धयान न देकर उनकी स्किल्स की तरफ धयान देना चाहिए।  एजुकेशन सिस्टम को इसे बदलने की जरूरत है। मार्क्स की वजह से बच्चे डीप्रेशन में चले जाते है एजुकेशन में उनके सुधार की जरूरत है। 


शिक्षा में सुधार 


 ग्रामीण और छोटे शहरों के स्कूल्ज में निवेश करने की जरूरत है। स्मार्ट क्लास की अवदाहरणा को बढ़ावा देना चाहिए। हर बच्चे के लिए  शिक्षा एक जैसी होनी चाहिए। हर स्कूल में शिक्षा के पर्याप्त साधन होने चाहिए। छोटे कस्बो  में भी पर्याप्त शिक्षा की सुविधा होनी चाहिए। 


 



 Thank you 


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